यह टीचर छोटी बच्चियों की पूजा के बाद ही शुरु करता है पढ़ाना, वजह जान कर हैरान होंगे आप

Education News: हमारे देश की संस्कृति और सभ्यता हमें बालिका और महिलाओं का सम्मान करना सिखाती है। घर के बुजुर्ग बच्चों को ही यह संस्कार देना शुरू कर देते हैं। समय -समय पर की गई गलती के बाद बच्चों को उसके दुष्प्रभाव भी बताया करते थे। जैसे कन्या को कभी पैर नहीं लगाना, अपशब्द नहीं बोलना, हमेशा नारी शक्ति का सम्मान करना इत्यादि। मध्य प्रदेश के कटनी जिले में ऐसे ही एक शिक्षक ने महिला और बालिका सम्मान की अनूठी मिसाल पेश की है। यह शिक्षक बीते 23 वर्षों से स्कूल में बालिकाओं के चरण पूजन के बाद ही अध्यापन का कार्य शुरु करते हैं। यह पाठशाला कटनी जिले के लोहरवारा में है। प्रभारी भैया लाल सोनी पाठशाला में आने वाली बालिकाओं के प्रार्थना से पहले गंगा जल से पांव धोते हैं। पूजन करने के बाद ही अध्यापन का कार्य शुरु किया जाता है।

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उनका बताया कि एक पवित्र सोच के साथ नमामि जननी अभियान की शुरुआत की थी। इस अभियान का मकसद बालिका और महिलाओं का सम्मान करना है। नवरात्र में बालिकाओं का जिस तरह से पूजन होता है, वैसा ही पूजन नियमित तौर पर विद्यालय प्रांगण में किया जाता है।

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शिवराज सिह की सरकार ने भी 25 जनवरी को सुशासन दिवस के मौके पर घोषणा की कि सभी सरकारी कार्यक्रम कन्या पूजन के साथ शुरु होंगे। विद्यालय में बालिका और महिला सम्मान के लिए नमामि जननी अभियान चलाया जा रहा है, वहीं स्वच्छता का संदेश देने और छुआछूत को भी दूर करने के प्रयास जारी हैं।

सोनी को यह प्रेरणा परिवार से मिली। लोगों की सोच बदले इसे ध्यान में रखकर नमामि जननी अभियान कार्यक्रम शुरु किया। यह काम बालिका और महिलाओं के सम्मान में एक अच्छी पहल है। प्रार्थना के पहले यहां का नजारा अलग हेाता है, बालिकाओं का पूजन किया जाता है। इसकी हर कोई सराहना भी करता है।

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बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के नारे को शिक्षक राजा भैया ने सही अथोर्ं में सार्थक किया है। शिक्षक द्वारा कन्या पूजन से न केवल स्कूल में पढ़ने वाली बच्चियों में उत्साह का संचार है, बल्कि लोंगों में भी जागरूकता देखी जा सकती है। यही कारण है कि लोग शिक्षक राजा भैया के अनुकरणीय कार्य की सराहना करते हैं। राजा भैया स्थानीय, जिला स्तर से लेकर प्रदेश देश स्तर पर सम्मानित हो चुके हैं। उन्हें इंडिया व एशिया बुक रिकॉर्डस में भी शामिल किया जा चुका है ।

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By Blackyogi0001

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